radiation risks from ct

Why HRCT is dangerous to our body?

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सीटी स्कैन हमारे शरीर के लिए खतरनाक क्यों है?

जब से कोरोना महामारी का प्रकोप छाया है तब से है इंसान कुछ मेडिकल टर्म्स को भलीभाँति बोलने लगा है या बोलने की कोशिश कर रहा है. इन टर्म्स में HRCT, RT-PCR, CT Score, CT Value, Quarantine आदि के साथ-साथ Remdesivir प्रमुखता से शामिल हैं.

पिछले कई महीनों में भारतीय डॉक्टर्स द्वारा अधिकांश मरीजों के लिए HRCT टेस्ट लिखे जा रहे हैं. हालत यहाँ तक पहुँच गए है कि डायग्नोस्टिक सेंटर्स पर मरीजों की भीड़ बहुत बढ़ गई है.

आज हम HRCT के बारे में बात करेंगे और इसके सम्बन्ध में समझेंगे कि यह क्या होता है, किस काम आता है और इसका हमारे शरीर पर कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

What is HRCT?

HRCT टेस्ट का पूरा नाम High Resolution Computed Tomography है. यह सीटी स्कैन शरीर के कई हिस्सों की क्लियर इमेज के लिए करवाया जाता है जिनमे छाती, पेट, सिर, पेल्विस आदि शामिल हैं.

वर्तमान महामारी के दौर में Chest HRCT अधिकांश डॉक्टर्स द्वारा करवाई जा रही है. डॉक्टर्स के अनुसार जब मरीज में कोरोना के लक्षण दिखाई देते हैं और उसका RT-PCR टेस्ट नेगटिव आता है तब इस टेस्ट को करवाने से फेंफडों में कोरोना के संक्रमण का पता चल जाता है.

भारत में यह टेस्ट धड़ल्ले से करवाया जा रहा है जबकि यूरोप और अमेरिका में यह टेस्ट कोरोना की जाँच के लिए नहीं करवाया जाता है. ना तो यह टेस्ट और ना ही Remdesivir का प्रयोग इन देशों के मेडिकल प्रोटोकॉल में है.

यह सोचने वाली बात है कि जब इन विकसित देशों में कोरोना की जाँच के लिए यह टेस्ट नहीं करवाया जा रहा है तो फिर भारत में यह टेस्ट क्यों करवाया जा रहा है. क्या हमारा मेडिकल सिस्टम इन विकसित देशों से भी आगे निकल गया है?

मैं आपको इसका कारण बताता हूँ जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएँगे. दरअसल इस टेस्ट का हमारे शरीर पर बहुत हानिकारक प्रभाव पड़ता है और इन विकसित देशों द्वारा इस टेस्ट को नहीं करवाए जाने का कारण इसके द्वारा फेंफडों को होने वाला नुकसान है.

Effect of HRCT on human body

यह एक साबित तथ्य है कि एक Chest CT Scan के दौरान रेडिएशन का स्तर सामान्य एक्स रे के मुकाबले तीन सौ से छः सौ गुना अधिक होता है. इसका मतलब यह है कि सामान्य एक्स रे के मुकाबले तीन सौ से छः सौ गुना अधिक नुकसानदायक है.

यह बात विदेशी मीडिया और विभिन्न प्रामाणिक स्त्रोतों से पता की जा सकती है. अगर भारतीय स्त्रोत की बात की जाए तो यही बात हमारे दिल्ली के AIIMS के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहकर इसके खतरों के प्रति आगाह भी किया है.

इतना असर तो Chest CT Scan में होता है. पेट और पेल्विस के CT Scan में तो और अधिक रेडिएशन काम में लिया जाता है जिससे हमारे शरीर को और अधिक नुकसान होता है.

यहाँ हमें यह समझना है कि आखिर रेडिएशन का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है. दरअसल इस प्रकार के टेस्ट में एक्स रेज का इस्तेमाल होता है. शरीर के जिस हिस्से का टेस्ट करना होता है उस हिस्से को एक्स रेज के सामने एक्स्पोज किया जाता है यानि वहाँ पर एक्स रेज डाली जाती है.

आपने एक्स रे टेस्ट करवाते समय देखा होगा कि शरीर के जिस अंग का एक्स रे करवाना है उस अंग पर एक्स रेज डाली जाती हैं. ठीक इसी प्रकार की प्रक्रिया सीटी स्कैन के समय होती है.

यहाँ फर्क इतना होता है कि सीटी स्कैन के दौरान शरीर पर एक्स रे के मुकाबले कई सौ गुना अधिक रेडिएशन डाला जाता है.

यह साबित तथ्य हैं कि हमारा शरीर एक्स रे किरणों को झेलने के लिए नहीं बना है. इन किरणों को शरीर पर डाले जाने के कारण हमारे शरीर में कैंसर पैदा होता है जो कि अभी तक एक लाइलाज बीमारी है.

How radiation works on human body?

एक्स रेज का रेडिएशन हमारे शरीर पर Ionising effect पैदा करता है जिसकी वजह से शरीर में फ्री रेडिकल्स बनने लगते हैं जो कैंसर पैदा करने में सहायक होते हैं. साथ ही इन रेज की वजह से हमारी शरीर की कोशिकाओं और जेनेटिक मटेरियल को नुकसान पहुँचता है.

साथ ही ये रेडिएशन शरीर में इकठ्ठा होता रहता है और अपना cumulative effect डालता है जिसका नतीजा इसी खतरनाक बीमारी के रूप में सामने आता है.

स्पष्ट शब्दों में इन एक्स रेज के रेडिएशन से हमारे शरीर में कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी पैदा होती है.

जब एक सामान्य एक्स रे के दौरान उपयोग में आने वाले रेडिएशन को ही शरीर के लिए नुकसानदायक माना जाता है लेकिन अब तो सीटी स्कैन रूप में इससे कई गुना अधिक रेडिएशन शरीर पर डाला जाता है. इसका नतीजा आप खुद सोच सकते हैं.

एक स्वस्थ आदमी अपने पूरे जीवन काल में शायद पाँच-दस से अधिक एक्स रे नहीं करवाता है लेकिन जब आप एक सीटी स्कैन करवा लेते हैं तो इसका मतलब आपने अपने शरीर पर सैंकड़ों एक्स रे करवा लिए हैं.

Why HRCT needed in Corona?

आखिर अनावश्यक रूप से सीटी स्कैन क्यों करवाए जा रहे हैं? ये टेस्ट करवाने से किसे फायदा हो रहा है? हम अनावश्यक रूप से ये टेस्ट करवाकर पैसों के साथ-साथ अपने शरीर को भी नष्ट कर रहे हैं.

वैसे भी आप सोचिये कि इस टेस्ट से डॉक्टर्स करते क्या हैं. इस टेस्ट से परीक्षा के परिणाम की तरह हमें एक स्कोर मिलता है जिसे सीटी स्कोर कहते हैं. अमूमन यह 0-25 के बीच में होता है. जीरो का मतलब कम इन्फेक्शन और पच्चीस का मतलब अधिकतम इन्फेक्शन होता है.

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इस टेस्ट से यह स्कोर देखकर क्या निर्णय लिए जाते हैं यह समझ से परे है. जब महामारी का दवा के रूप में सीधे तौर पर कोई इलाज नहीं है, जब पेशेंट को केवल पेरासिटामोल, स्टेरोइड्स आदि दवाइयों के साथ-साथ ऑक्सीजन और अन्य सपोर्ट सिस्टम पर ही रखना है तो इस टेस्ट से क्या हासिल होगा?

जो सपोर्ट सिस्टम इस टेस्ट के बाद में काम में लेना है वो इस टेस्ट से पहले क्यों नहीं लिया जा सकता है? क्या मशीन के अतिरिक्त मरीज का शरीर उसे उसके अन्दर होने वाले परिवर्तनों के बारे में कुछ भी नहीं बताता है?

How radiation measured?

यहाँ हम बात करेंगे कि इस रेडिएशन को नापा कैसे जाता है. एक डायग्नोस्टिक स्कैन के दौरान रेडिएशन की जितनी मात्रा हमारा शरीर ग्रहण करता है उसे milli-sieverts (mSv) के रूप में मापा जाता है.

वैसे हम चौबीसों घंटे रेडिएशन के संपर्क में आते रहते हैं. एक सामान्य इंसान इस रेडिएशन को प्राकृतिक रूप से सूरज से, धरती से और नेचुरल केमिकल्स से लेता रहता है.

प्राकृतिक रेडिएशन लेना हमारी मजबूरी है जिसे हमारा शरीर सहन भी कर लेता है. लेकिन जब हम डायग्नोस्टिक सेंटर्स से जाँच के नाम पर अतिरिक्त रेडिएशन लेते हैं तब इसके दुष्प्रभाव बढ़ते जाते हैं.

Dose of radiation in different CT Scans and X-rays

अब हम कुछ टेस्टों के दौरान काम आने वाले रेडिएशन की मात्रा के बारे में बात करते हैं. ये आंकड़े हार्वर्ड हेल्थ स्कूल और अमेरिकन गवर्नमेंट की वेबसाइट से लिए गए हैं जिन्हें आप भी देख सकते हैं.

इन आंकड़ों के अनुसार हमारा शरीर Chest x-ray के दौरान 0.01 mSv, Dental x-ray में 0.005 mSv जबकि Chest CT में 4-8 mSv, Abdominal CT में 8-10 mSv, Pelvis CT में 10 mSv और Head CT में 2 mSv रेडिएशन लेता है.

अगर आप इन आंकड़ों का विश्लेषण करेंगे तो पाएँगे कि हमारे शरीर को Chest x-ray में 0.01 mSv रेडिएशन जबकि Chest CT में 4-7 mSv रेडिएशन को झेलना पड़ता है. आप खुद देख लीजिये कि Chest CT में Chest x-ray के मुकाबले कितने गुना अधिक रेडिएशन काम में आ रहा है.

यह तय है कि जितना अधिक रेडिएशन हमारे शरीर पर पड़ेगा तब हमारा शरीर उतना उतना ही अधिक कैंसर होने की तरफ बढेगा. आप खुद सोचिये और समझिये कि अनावश्यक और आवश्यक जाँच करवाना हमें कैंसर की तरफ तो नहीं धकेल रहा है.

अतः जब तक बहुत जरूरी नहीं हो रेडिएशन से सम्बंधित कोई भी टेस्ट नहीं करवाना चाहिए.

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About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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