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Can pharmacist open pharma clinic?

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क्या फार्मासिस्ट फार्मा क्लिनिक शुरू कर सकता है?

फार्मा क्लिनिक एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर बहुत से लोगों का मन रोमांचित हो जाता है. जिस प्रकार Drx टाइटल से डॉक्टर जैसी फीलिंग आती है ठीक उसी प्रकार फार्मा क्लिनिक से अपने क्लिनिक में बैठकर पेशेंट्स का ईलाज करने की फीलिंग आती है.

Clearance about drx title

यहाँ मैं आपको क्लियर कर दूँ कि जिस प्रकार स्टूडेंट्स में Drx टाइटल को लेकर भ्रम फैला हुआ है ठीक उसी प्रकार फार्मा क्लिनिक को लेकर भी भ्रम फैला हुआ है.

लेकिन इन्हें यह समझ लेना चाहिए कि जिस प्रकार Drx टाइटल ऑथेंटिक और लीगल नहीं है ठीक उसी प्रकार फार्मा क्लिनिक का कांसेप्ट भी ऑथेंटिक और लीगल नहीं है.

Pharmacy Practice Regulations 2015 - PPR 2015

फार्मा क्लिनिक के सम्बन्ध में अलग-अलग माध्यमों से यह प्रचारित किया जाता रहा है कि भारत सरकार ने फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन्स 2015 (Pharmacy Practice Regulations 2015 - PPR 2015) के अंतर्गत फार्मासिस्टों को फार्मा क्लिनिक खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है.

यह बात सरासर गलत है और भारत सरकार ने ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है. फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया ने भी इस सम्बन्ध में एक सर्कुलर जारी करके कहा था कि कोई भी फार्मासिस्ट किसी भी तरह का फार्मा क्लिनिक खोलकर ईलाज नहीं कर सकते हैं.

इस सर्कुलर में यह भी कहा गया था कि पीपीआर 2015 के अनुसार फार्मासिस्ट केवल रजिस्टर्ड मेडिकल प्रक्टिसनर्स के प्रिस्क्रिप्शन को डिस्पेंस कर सकता है और मरीज को केवल प्रिस्क्रिप्शन और दवाइयों से सम्बंधित सलाह दे सकता है.

लेकिन फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया के स्पष्टीकरण के बावजूद अभी तक भी फार्मा क्लिनिक के सम्बन्ध में भ्रम के बादल छटें नहीं है. अभी भी बहुत से लोग अपने आप को Drx टाइटल लगाकर फार्मा क्लिनिक में पेशेंट्स से घिरा हुआ होने की कल्पना में लीन हैं.

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सपने देखना गलत नहीं है लेकिन गलत काम करना गलत है. अभी तक फार्मासिस्ट को सिवाय रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा लिखे गए प्रिस्क्रिप्शन पर लिखी हुई दवा देने के अतिरिक्त कोई विशेष अधिकार नहीं है.

फार्मा क्लिनिक नामक इस सारे फसाद की शुरुआत फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन्स 2015 से हुई है जिसको कई लोगों ने अपने-अपने हिसाब से समझ लिया है. आज हम फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन्स 2015 को ढंग से समझते हैं जिससे आपके सामने दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

सबसे पहली और सबसे अधिक मजेदार बात तो यह है कि जिस फार्मा क्लिनिक के बारे में इतनी बात की जा रही है उसका फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन्स 2015 में एक भी बार जिक्र तक नहीं है. अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिसका जिक्र तक नहीं है उसको शुरू कैसे किया जा सकता है.

दूसरा, ये रेगुलेशन्स मुख्यतया फार्मेसी यानि ड्रग स्टोर के ऊपर लागू होते हैं और उसी के सम्बन्ध में बात की गई है. इसमें बताया गया है कि ड्रग स्टोर के ओनर का नाम कहाँ लिखा होना चाहिए, फार्मासिस्ट को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए.

सबसे पहले हम उस बात पर डिस्कशन कर लेते हैं जिसकी वजह से शायद फार्मा क्लिनिक का मुद्दा उठा है. इस रेगुलेशन में एक जगह प्रोफेशनल सर्विस के एवज में पेमेंट लेने की बात कही गई है.

इसके अनुसार अगर कोई पेशेंट यह प्रोफेशनल सर्विस लेता है तो उसे पहले से तय फीस फार्मासिस्ट को देनी होगी.

अब यह बात सामने आती है कि ये कौनसी प्रोफेशनल सर्विस है जिसके लिए फीस चार्ज की जा सकती है. दरअसल पेशेंट काउंसेलिंग को ही प्रोफेशनल सर्विस बताया गया है यानि फार्मासिस्ट केवल दवा और प्रिस्क्रिप्शन के सम्बन्ध में पेशेंट को जानकारी दे सकता है.

अमूमन यह जानकारी फार्मेसी के अन्दर ही दी जाती है लेकिन इसे टेलीफोनिक भी दिया जा सकता है. इस पूरे रेगुलेशन में कही भी यह नहीं है कि फार्मासिस्ट अपना क्लिनिक शुरू करके पेशेंट्स को ड्रग प्रेस्क्राइब कर सकता है.

Restrictions for pharmacist

इस रेगुलेशन में तो फार्मासिस्ट को कई कार्यों के लिए रोका गया है. फार्मासिस्ट बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के कोई भी दवा पेशेंट को नहीं दे सकता है, साथ ही बिना डॉक्टर की परमिशन के प्रिस्क्रिप्शन की किसी भी दवा का सब्स्टीट्यूट नहीं दे सकता है.

फार्मासिस्ट अपने आपको स्पेशलिस्ट नहीं कह सकता है. फार्मासिस्ट किसी भी प्रकार से अपना विज्ञापन नहीं कर सकता है. ये सभी कार्य मिसकंडक्ट की श्रेणी में माने गए हैं.

अगर कोई फार्मासिस्ट किसी फार्मेसी पर कार्य कर रहा है तो फिर वह अन्य किसी भी जगह पर कार्य नहीं कर सकता है फिर चाहे वो दूसरी फार्मेसी हो या फिर कोई फार्मेसी कॉलेज. कुल मिलाकर के एक फार्मासिस्ट अपनी शिफ्ट पूरी होने के बाद में सिवाय आराम के कुछ नहीं कर सकता है.

अब आप कल्पना कर सकते हैं कि जब फार्मासिस्ट को टीचिंग या किसी अन्य जॉब के साथ फार्मेसी शुरू करने की इजाजत नहीं है तो फिर उसे क्लिनिक शुरू करने की इजाजत कैसे होगी.

जिस प्रकार भारत में फार्मासिस्ट की इमेज है और जिस प्रकार भारत में फार्मासिस्ट की जगह दूसरे लोग दवा वितरण का कार्य बड़ी आसानी से कर लेते हैं उसे देखकर तो यह कदापि नहीं लगता कि कोई पेशेंट फार्मासिस्ट से प्रोफेशनल सर्विस लेकर उसे फीस देगा.

फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन्स 2015 को लागू हुए जनवरी में छः वर्ष हो जाएँगे, आप में से कितने लोगों ने फार्मासिस्ट को प्रोफेशनल सर्विस के लिए फीस चार्ज करते हुए और पेशेंट को फीस देते हुए देखा है.

हमें यह समझ लेना होगा कि जो काम हमारे अधिकार में है और जिसे करने के लिए हम अधिकृत हैं, हमें सिर्फ वो ही काम करना चाहिए.

उम्मीद है कि आपको फार्मा क्लिनिक के सम्बन्ध में दी गई जानकारी पसंद आई होगी. अगर आपके कोई प्रश्न या सुझाव हो तो उसे आप कमेंट करके बता सकते हैं.

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About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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