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Career option in Pharmacy

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फार्मेसी में करियर

अगर आप medicines के area में अपना career बनाना चाहते हैं तो pharmacy की पढाई आपके लिए है.

फार्मेसी यानि भेषज विज्ञान दवाओं से सम्बंधित पढाई है जिसमे दवाइयों की manufacturing, storage और distribution के अलावा उससे जुड़े business और work के बारे में detailed knowledge दिया जाता है.

एक trained person ही दवाओं के बारे में सही प्रकार से समझ सकता है और उनकी manufacturing, storage और distribution के कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकता है.

इसलिए दवा की बिक्री सम्बन्धी व्यापार को शुरू करने के लिए trained person की आवश्यकता होती है और वो trained person है pharmacist.

Why pharmacist is important in healthcare?

बिना फार्मासिस्ट के दवा की बिक्री सम्बन्धी किसी भी कार्य को नहीं किया जा सकता क्योंकि drugs and cosmetics act and rules के अनुसार इन कायों को करने के लिए फार्मासिस्ट की जरुरत होती है.

बिना फार्मासिस्ट की उपस्थिति के दवा के storage और distribution सम्बन्धी कार्य नहीं किये जा सकते हैं इसलिए दवा सम्बन्धी क्षेत्र के लिए फार्मेसी की पढ़ाई बहुत महत्वपूर्ण होती है.

फार्मासिस्ट बनने के लिए हमें फार्मेसी की शिक्षा लेनी होती है. मूलरूप से फार्मेसी में डिप्लोमा या डिग्री की पढाई करने के बाद में फार्मासिस्ट की उपाधि प्राप्त होती है.

इसे समझने के लिए हमें फार्मेसी में पढाये जाने वाले विभिन्न courses के बारे में समझना होगा.

Courses in pharmacy

फार्मेसी में मुख्यतया दो तरह के basic कोर्स करवाए जाते हैं और दोनों ही को पूर्ण करने के पश्चात विद्यार्थी फार्मासिस्ट कहलाता है. ये दो कोर्स है, दो वर्षीय डिप्लोमा और चार वर्षीय डिग्री कोर्स, इनमें डिप्लोमा कोर्स को D Pharm और डिग्री कोर्स को B Pharm कोर्स कहा जाता है.

D Pharm course

इन दोनों में प्रमुख अंतर यह होता है कि डी फार्मा एक डिप्लोमा स्तर का कोर्स है जिसको पूर्ण करने के पश्चात विद्यार्थी graduate नहीं हो पाता है तथा graduation level की competitive exams में भाग नहीं ले पाता है. graduate होनें के लिए अलग से कोई दूसरा course करना पड़ता है.

B Pharm course

बी फार्मा एक ग्रेजुएशन कोर्स है जिसको पूर्ण करने के पश्चात graduate हो जाते हैं और किसी भी graduation level की competitive exams में भाग ले सकते है. अभी वर्तमान तक दोनों ही कोर्स करने वाले विद्यार्थी फार्मासिस्ट कहलाते हैं.

दोनों ही कोर्स करने के लिए minimum eligibility physics और chemistry के साथ biology या maths में से किसी एक विषय में सीनियर सेकेंडरी की परीक्षा पास होनी चाहिए अर्थात साइंस मैथ्स (PCM) और साइंस बायोलॉजी (PCB) में बाहरवीं पास विद्यार्थी ही ये कोर्स कर सकता है.

बी फार्मा डिग्री धारी फार्मासिस्ट के लिए drug manufacturing industry में अच्छे अवसर होते हैं जहाँ वह manufacturing chemist की post पर कार्य कर सकता है.

जैसे-जैसे वक्त गुजरता जाता है वैसे वैसे experience में बढ़ोतरी होने से promotion के अच्छे अवसर मिलते जाते हैं.

सरकारी क्षेत्र में बी फार्मा डिग्री धारी फार्मासिस्ट के लिए वक्त-वक्त पर drug inspector की vacancy निकलती है जिसके लिए competitive exam आयोजित होती है.

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ड्रग इंस्पेक्टर का प्रमुख कार्य दवा विक्रेताओं और दवा निर्माण उद्योगों का inspection कर दवाइयों की quality का निर्धारण सुनिश्चित करना है.

बी फार्मा के पश्चात डिप्लोमा फार्मेसी के colleges में teachers की job प्राप्त की जा सकती है.

बी फार्मा के बाद में drug marketing के area में भी काफी अवसर होते हैं परन्तु इस क्षेत्र में जाने के लिए व्यक्ति में management सम्बन्धी qualities होना अत्यावश्यक है.

संभवतः इसीलिए marketing के क्षेत्र में बी फार्मा के साथ MBA डिग्री धारी candidate के लिए अधिक अवसर होते हैं.

M Pharm course

बी फार्मा के पश्चात दो वर्षीय मास्टर डिग्री M Pharm भी की जा सकती है. इस मास्टर डिग्री को करने के पश्चात फार्मेसी colleges में teaching के साथ-साथ दवा उद्योग में भी अवसर प्राप्त हो जाते हैं.

दवा उद्योग में मुख्यतया producation, quality control, research and development आदि विभागों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं.

Pharm D course

फार्मासिस्ट के लिए भारत से बाहर के देशों में भी काफी अवसर होते हैं. लेकिन अगर कोई फार्मेसी की पढाई करके अमेरिका जाना चाहता है तो उसे Pharm D course करना पड़ेगा क्योंकि अमेरिका में जाकर वहाँ पर फार्मेसी क्षेत्र में कार्य करने के लिए नेप्लेक्स (NAPLEX.) परीक्षा पास करनी होती है.

NAPLEX परीक्षा में भाग लेने के लिए पहले foreign pharmacy exam को पास करके FPGEC certification लेना जरूरी होता है जिसके लिए फार्मेसी में पाँच वर्षीय कोर्स आवश्यक है.

चूँकि फार्म डी कोर्स clinical studies पर आधारित six year कोर्स होता है इसलिए इस कोर्स को करने के बाद में FPGEC certification के लिए होने वाली परीक्षा के लिए eligibility मिल जाती है.

डी और बी फार्मा धारी फार्मासिस्ट अस्पताल में hospital फार्मासिस्ट, समाज में community फार्मासिस्ट की भूमिका बखूबी निभाता है जहाँ उसका प्रमुख कार्य डॉक्टर के prescription पर मरीज को दवा वितरित करना है.

इसीलिए फार्मासिस्ट को मरीज और डॉक्टर के बीच की एक प्रमुख कड़ी के रूप में भी जाना जाता है. फार्मासिस्ट दवा के wholesale व्यापार के साथ-साथ retail व्यापार को भी कर सकता है.

मैंने आपको फार्मेसी क्षेत्र के theoretical aspects को बताया है. अगर practically देखा जाए तो अवसरों की कमी तो नहीं है लेकिन सीमित जरूर है.

आपको यह भी ध्यान रखना पड़ेगा कि drug manufacturing industry में फार्मासिस्ट की monopoly नहीं है और यहाँ पर नौकरी के लिए सभी विभागों में BSC और MSC candidates के साथ competition करना पड़ता है.

वर्तमान में यह क्षेत्र private sector के साथ खुद का काम करने वालों के लिए उपयुक्त है लेकिन अगर कोई इस क्षेत्र में केवल सरकारी नौकरी पाने के लिए ही आना चाहे तो अवसर अभी काफी कम है.

पिछले कुछ वर्षों में सरकारी अस्पतालों में डिप्लोमा लेवल पर drug distribution के लिए फार्मासिस्ट की vacancy निकलना शुरू हुई है लेकिन इनमे बहुत मारामारी है.

एक तो इन vacancy में post काफी कम होती है और दूसरा डिप्लोमा लेवल की नौकरी के लिए एक D Pharm candidate को B Pharm, M Pharm के साथ-साथ PhD degree holder के साथ भी competition करना पड़ता है.

अभी कुछ समय पहले फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा फार्म डी डिग्री होल्डर्स को भी इस कार्य के लिए अनुमति मिल जाने के कारण हो सकता है कि भविष्य में ये कम्पटीशन और कठिन हो जाए.

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About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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